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शुक्रवार, 28 मार्च 2008

सहवाग का कमाल

आखीर ईद का चाँद निकल ही गया एक और जानदार प्रदर्शन सहवाग का खेल देख कर फिर एक उम्मीद जागी है कि सचिन के बाद शायद भारतीय क्रिकेट बल्लेबाजी में कुछ जान बची रहेगी

भारतीय क्रिकेट के लिये आज का दिन कई मायनों मे सुनहरा माना जाएगा आज सहवाग "सर डॉन ब्रैडमैन" और "ब्राइन लारा" के श्रेणी मे शामिल हो गये है , और साथ-साथ अपने टेस्ट मैच मे सार्वाधिक रन भी बनाया है साहवाग अब एक नया किर्तीमान बनाते हुए , एक ही पारी में दो दोहरे सतकीय साझीदारी मे हिस्सा लेने वाले पहले खिलाङी भी बन गये हैं इस तीहरे सतक को सबसे कम बौलों मे होने का भी गर्व भी हासिल हो गया है आज तो ऐसा लग रहा है कि सचिन के बाद , अब सहवाग ने किर्तीमान तोङने की बागडोर संभाल ली है

सहवाग की पारी एक रनों कि बौछार से कम नहीं थी , चाहे जो भी साउथ अफ्रिकी गेंदबाज हो सहवाग ने सब की धुनाई की अगर सहवाग इसी फार्म में बने रहें तो भारतीय क्रिकेट के सुनहरे दिन आने में देर नहीं होगी

बुधवार, 27 फ़रवरी 2008

क्रिकेट अब सभ्यों का खेल नहीं रहा

क्रिकेट-जगत में इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है , उससे तो बस एक ही बात मन मे आती है कि "क्रिकेट अब सभ्यों का खेल नहीं रहा " । भारत - ऑस्ट्रेलिया सीरीज ने तो इस पर मुहर लगा दी है । हर दूसरे खेल के दौरान कोई-ना-कोई विवाद उठ खङा होता है । इस सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाङीयो का व्यवहार निम्न अस्तर का, पुरा क्रिकेट समुदाय थु-थु कर रहा है , लेकिन इन मद-मस्तों के कान पर जूँ तक नहीं रेंगती ।

यह विवाद क्रिकेट के मुल पहचान को बदल रहा है । अब हर टीम मे स्लोजींग एक अभिन्न अंग बनता जा रहा है । इसे इर्जाद करने वाले ऑस्ट्रेलियन को, यह पैतरा उलटा पङ रहा है । इन सब के बीच भारतीय युवा खिलाङीयो को थोङा सतर्क रहने कि जरुरत है । खेलना मुख्य उद्देश्य रहना चाहीए ।

बुधवार, 9 जनवरी 2008

भारत की सिडनी जीत

आखिरकार आईसीसी को सच्चाई के सामने झुकना ही पङा । शायद इसे कुछ लोग इसे घनी बीसीसीआई के सामने आईसीसी का नतमस्तक होना कहे या फिर दो देशों के बीच एक बङा विवाद पर पुर्ण-विराम लगाने कि कोशीश कहे । मेरा यह मानना है कि आज क्रिकेट और भारत की वर्षों पुरानी रंग भेद के संघर्ष की फिर जीत हुई है ।
खेल को युद्घ मे बदलने की रिकी पौन्टींग कि कोशिश को एक करारा जवाब मिला है । आज औस्ट्रेलिया के लोग हि रिकी पौन्टींग के दुर्योघन-नीति को अस्वीकार कर दिया है । खेल अगर खेल कि भावना से ना खेला जाए , इसका नजारा तो सारी दुनिया ने सिडनी टेस्ट मे देखा है । और अब रिकी पौन्टींग को शायद ये समझ आ जाए कि क्रिकेट प्रेमीयों ने चाहे औस्ट्रेलियाई हो या भारतीय , सिर्फ एक सभ्य तरीके का खेल देखना चाहती है ।